यीशु मसीह का मुख्य उद्देश्य क्या था ?

यीशु मसीह के जीवन का मुख्य उद्देश्य परमेश्वर की योजना को पूरा करना था, जो पूरी मानव जाति को पाप और उसके दुष्परिणाम से बचाने के लिए था। यह उद्देश्य बाइबिल में स्पष्ट रूप से वर्णित है और इसे तीन मुख्य भागों में समझा जा सकता है:

1. पापियों को उद्धार देना

बाइबिल के अनुसार, मानव जाति पाप में गिरी हुई थी और परमेश्वर से अलग हो गई थी। यीशु मसीह ने अपने बलिदान और पुनरुत्थान के द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार का मार्ग प्रदान किया।
बाइबिल वचन:

  • "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना इकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।" (यूहन्ना 3:16)
  • "क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये आया है कि खोए हुओं को ढूंढ़े और उनका उद्धार करे।" (लूका 19:10)

2. परमेश्वर और मनुष्य के बीच मेल कराना

पाप ने मनुष्य और परमेश्वर के बीच दूरी पैदा कर दी थी। यीशु मसीह ने अपने बलिदान के द्वारा उस दूरी को पाटने का काम किया, ताकि मनुष्य परमेश्वर के साथ संबंध स्थापित कर सके।
बाइबिल वचन:

  • "क्योंकि परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है।" (1 तीमुथियुस 2:5)
  • "इसलिये कि जब हम शत्रु ही थे तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा परमेश्वर से मेल हो गया..." (रोमियों 5:10)

3. परमेश्वर के राज्य का प्रचार करना

यीशु मसीह ने अपने प्रचार के द्वारा स्वर्ग के राज्य का सुसमाचार दिया और सिखाया कि मनुष्य कैसे परमेश्वर के राज्य का हिस्सा बन सकता है।
बाइबिल वचन:

  • "तौभी मुझे आज और कल और परसों चलना अवश्य है, क्योंकि यह उचित नहीं कि भविष्यद्वक्ता यरूशलेम से बाहर मरे।" (लूका 13:33)
  • "यीशु कहने लगे, 'समय पूरा हो गया है, और परमेश्वर का राज्य निकट आ गया है। मन फिराओ और सुसमाचार पर विश्वास करो।'" (मरकुस 1:15)

4. प्रेम, दया और क्षमा का उदाहरण प्रस्तुत करना

यीशु मसीह ने अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से प्रेम, दया और क्षमा का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने लोगों को सिखाया कि वे अपने शत्रुओं से भी प्रेम करें और परमेश्वर के नियमों का पालन करें।
बाइबिल वचन:

  • "तुम शत्रुओं से प्रेम करो और जो तुम से बैर करें उनके लिये भलाई करो।" (लूका 6:27)
  • "जैसे मैंने तुम से प्रेम किया है, तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।" (यूहन्ना 13:34)

5. अनन्त जीवन का मार्ग प्रदान करना

यीशु मसीह ने अपने बलिदान और पुनरुत्थान के द्वारा मृत्यु को हराया और मानव जाति को अनन्त जीवन का आश्वासन दिया।
बाइबिल वचन:

  • "मैं पुनरुत्थान और जीवन हूं; जो मुझ पर विश्वास करता है वह जीएगा, चाहे वह मर भी जाए।" (यूहन्ना 11:25)
  • "मैं मार्ग, सत्य और जीवन हूं; बिना मेरे कोई पिता के पास नहीं आ सकता।" (यूहन्ना 14:6)

सारांश

यीशु मसीह का मुख्य उद्देश्य था:

  1. पापियों को उद्धार देना।
  2. परमेश्वर और मनुष्य के बीच मेल कराना।
  3. परमेश्वर के राज्य का प्रचार करना।
  4. प्रेम, दया और क्षमा का उदाहरण प्रस्तुत करना।
  5. मानव जाति को अनन्त जीवन का मार्ग प्रदान करना।


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